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जवइनिया गंगा नदी के किनारे कटाव नियंत्रण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप

Former MLA Munni Devi: शाहपुर की पूर्व विधायक मुन्नी देवी ने कहा कि गंगा मैया की लहरें तो घरों को निगल ही रही हैं, लेकिन यह भ्रष्ट तंत्र सरकारी खजाने और जन विश्वास को भी निगल जाएगा।

  • हाइलाइट: Former MLA Munni Devi
  • पूर्व विधायक मुन्नी देवी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, कई गंभीर सवाल उठाए

आरा। शाहपुर प्रखंड का जवइनिया गांव इन दिनों गंगा नदी के किनारे कटाव नियंत्रण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पूर्व विधायक मुन्नी देवी ने इस गंभीर मामले में सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। क्षेत्र के लोग अब इस उम्मीद में हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय से इस मामले में त्वरित संज्ञान लिया जाएगा। फिलहाल, जवइनिया की जनता एक पारदर्शी और सुरक्षित भविष्य की बाट जोह रही है।

Former MLA Munni Devi: वर्ष 2025 में सैकड़ों घर गंगा नदी की भेंट चढ़ गए

मामले की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो वर्ष 2025 में गंगा के रौद्र रूप ने जवइनिया गांव में तबाही मचाई थी। इस प्राकृतिक आपदा में सैकड़ों घर नदी की भेंट चढ़ गए, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए। ग्रामीणों की पीड़ा और उनकी जमीन को बचाने के उद्देश्य से सरकार ने करीब 52 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। जिससे कटाव को रोककर बचे हुए गांव को सुरक्षित किया जाए। लेकिन दुर्भाग्यवश, यह सुरक्षा योजना अब स्वयं ही सवालों के घेरे में आ गई है।

पूर्व विधायक मुन्नी देवी ने गिनाई अनियमितताएं

पूर्व विधायक मुन्नी देवी ने अपने पत्र में तकनीकी और व्यावहारिक स्तर पर जो अनियमितताएं गिनाई हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। पहला मुख्य आरोप जियो-बैग्स (बालू भरी बोरियों) की गुणवत्ता को लेकर है। विभागीय गाइडलाइंस के अनुसार, इन बोरियों में बालू की एक निश्चित मात्रा और वजन होना अनिवार्य है, ताकि वे दबाव झेल सकें। लेकिन, तकनीकी रूप से यहां गलत कार्य हो रहा है। कमजोर बोरियां कुछ ही समय में कटकर बह जाएंगी।

दूसरा तकनीकी पहलू पारदर्शिता का है। किसी भी सरकारी प्रोजेक्ट में ‘सिटीजन चार्टर’ या ‘सिटीजन बोर्ड’ लगाना अनिवार्य होता है, जिस पर कार्य की लागत, समय सीमा और जिम्मेदारी का विवरण होना चाहिए। मुन्नी देवी के अनुसार, कार्य शुरू होने के बाद भी स्थल पर बोर्ड का न होना सीधे तौर पर पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। यह एक प्रोफेशनल प्रोटोकॉल है जिसे दरकिनार करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

रिकॉर्ड पर पांच प्राइवेट इंजीनियरों की तैनाती, उपस्थिति नगण्य

सुरक्षा और इंजीनियरिंग सुपरविजन के मोर्चे पर भी गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिकॉर्ड पर पांच प्राइवेट इंजीनियरों की तैनाती दिखाई गई है, लेकिन कार्यस्थल पर उनकी उपस्थिति नगण्य है। इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में साइट इंजीनियर की मौजूदगी अनिवार्य होती है ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा के लिए न तो फर्स्ट एड की सुविधा है, न ही मेडिकल किट। डीजल जैसे ज्वलनशील पदार्थों का असुरक्षित भंडारण और कटाव वाले संवेदनशील क्षेत्रों में बैरिकेडिंग का अभाव यह साबित करता है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारी सुरक्षा मानकों को लेकर कितने लापरवाह हैं।

पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि इन अनियमितताओं की जांच निष्पक्ष रूप से नहीं हुई, तो गंगा मैया की लहरें तो घरों को निगल ही रही हैं, लेकिन यह भ्रष्ट तंत्र सरकारी खजाने और जन विश्वास को भी निगल जाएगा।

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