HomeNewsबिहारभरत तिवारी हत्या के आरोपी जगदीशपुर SDPO राजेश शर्मा को नई पोस्टिंग

भरत तिवारी हत्या के आरोपी जगदीशपुर SDPO राजेश शर्मा को नई पोस्टिंग

DSP Rajesh Sharma: क्या भरत तिवारी के परिवार को चिढ़ा रही है सम्राट सरकार? हत्या के आरोपी DSP को दे दी बड़ी पोस्टिंग

  • हाइलाइट: DSP Rajesh Sharma
  • पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक लगाने जैसा फैसला

आरा। भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सम्राट सरकार का फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार ने इस मामले में आरोपी डीएसपी राजेश शर्मा को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो का जिम्मा दिया है। प्रशासनिक फेरबदल के तहत किए गए इस नियुक्ति ने न केवल आम जनता को चौंकाया है, बल्कि पीड़ित परिवार के लिए इसे एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

बुधवार को हुए प्रशासनिक बदलावों में जब 12 आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया, तब डीएसपी राजेश शर्मा को यह महत्वपूर्ण पद मिला। जानकारों के अनुसार, यह पोस्टिंग किसी भी मायने में सजा के तौर पर नहीं देखी जा रही है, बल्कि इसे प्रशासन में एक मलाईदार जिम्मेदारी माना जाता है। ऐसे समय में जब राजेश शर्मा पर हत्या जैसे गंभीर आरोप लगे हों, सरकार का यह कदम कई सवाल खड़े कर रहा है।

DSP Rajesh Sharma : पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक लगाने जैसा फैसला

भरत तिवारी के परिजन 17 जून से न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि जब तक आरोपी पुलिस अधिकारी पदों पर बने रहेंगे, तब तक निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेमानी है। परिवार का आरोप है कि सरकार की यह कार्रवाई उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भारी बहुमत और कमजोर विपक्ष के चलते सरकार के फैसलों पर नियंत्रण कम होता दिख रहा है, जिसका सीधा असर संवेदनशील मामलों पर पड़ रहा है।

डीएसपी राजेश शर्मा का करियर पहले भी विवादों से घिरा रहा है। जगदीशपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल विवादों के कारण ही समाप्त हुआ था। 17 जून को हुए भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद उन पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद उन्हें पुलिस मुख्यालय लाइन अटैच कर दिया गया था। उन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का आरोप है।

पुराना रिकॉर्ड और कार्यशैली पर सवाल?

दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब राजेश शर्मा किसी एनकाउंटर विवाद में फंसे हों। लगभग 19 साल पहले, वर्ष 2007 में, जब वे मुजफ्फरपुर में थाना प्रभारी थे, तब उन पर तीन युवकों के फर्जी एनकाउंटर का संगीन आरोप लगा था। तब से लेकर अब तक उनकी कार्यशैली लगातार सवालों के घेरे में रही है। राजेश शर्मा मूल रूप से दारोगा (SI) के पद से प्रमोट होकर डीएसपी (SDPO) की रैंक तक पहुंचे है।

एक ऐसे अधिकारी को, जिस पर हत्या जैसे गंभीर आरोप हों, उसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपना सरकार की मंशा पर संदेह पैदा करता है। भरत तिवारी का परिवार अभी भी इंसाफ की राह देख रहा है, लेकिन नई नियुक्ति ने इस कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक नैतिकता पर कई गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या भविष्य में इस मामले की जांच किसी तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच पाती है या फिर विवादों का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

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