MLC Sonu Rai : बिहार की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों भोजपुर-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव के परिणाम चर्चा का विषय बने हुए हैं।
- हाइलाइट: MLC Sonu Rai
- भोजपुर-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव में जीत:
- राजद में नई ऊर्जा और बैलेट पेपर पर बढ़ती बहस:
पटना। बिहार की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों भोजपुर-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव के परिणाम चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार सोनू कुमार राय ने जदयू के कन्हैया प्रसाद को पराजित कर एक शानदार जीत दर्ज की है। यह जीत न केवल राजद के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि इसने पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नया उत्साह भी भर दिया है।
MLC Sonu Rai: जीत के बाद सोनू राय का नेतृत्व के प्रति सम्मान
विजय प्राप्त करने के तुरंत बाद, नवनिर्वाचित विधान पार्षद सोनू राय ने पटना में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव से भेंट की। इस दौरान उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, युवा प्रकोष्ठ और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों से भी मुलाकात की। अपने संबोधन में सोनू राय ने कहा कि यह विजय केवल मेरी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, गरीब-गुरबों की बुलंद आवाज और महागठबंधन की विचारधारा में जनता व जनप्रतिनिधियों के अटूट विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने भोजपुर और बक्सर के सभी मतदाता मालिकों और शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे सदैव जनता के विश्वास और समर्थन का सम्मान करते हुए उनके हितों के लिए कार्य करेंगे।
राजद की बैलेट पेपर से चुनाव की मांग:
भोजपुर-बक्सर की जीत ने राजद को एक बार फिर से अपनी पुरानी मांग को मजबूती से उठाने का अवसर दिया है। तेजस्वी प्रसाद यादव ने इस जीत के साथ ही देश में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पुरजोर वकालत की है। तेजस्वी यादव का तर्क है कि यदि आज ईवीएम की जगह मतपत्रों का प्रयोग हो, तो भाजपा और एनडीए गठबंधन कहीं नहीं टिक पाएगा। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि पोस्टल बैलेट में राजद को 150 से अधिक सीटों पर बढ़त मिली थी, जिसे तंत्र-मंत्र और षड्यंत्र के जरिए बदल दिया गया।
तेजस्वी यादव का स्पष्ट मानना है कि लोकतांत्रिक पारदर्शिता और जनविश्वास को बहाल रखने के लिए बैलेट पेपर का उपयोग अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जब आज ईवीएम के दौर में भी परिणाम आने में आधी रात तक का समय लग जाता है, तो फिर मतपत्रों के इस्तेमाल में भी कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।
बिहार में अंतिम बार कब हुआ था बैलेट पेपर से चुनाव?
बैलेट पेपर की चर्चा के बीच यह जानना दिलचस्प है कि बिहार में इसका अंतिम बार प्रयोग कब हुआ था। प्रदेश में आखिरी बार बैलेट पेपर से चुनाव फरवरी 2000 में संपन्न हुए थे, जब झारखंड भी बिहार का ही हिस्सा था। उस समय राज्य में विधानसभा की कुल 324 सीटें थीं और बहुमत के लिए 163 का आंकड़ा आवश्यक था।
तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों में चारा घोटाले के कारण राजद और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़े थे। राजद ने 293 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, जिसमें उसे 124 सीटों पर जीत मिली थी। गठबंधन के साथ राबड़ी देवी के नेतृत्व में कुल 159 सीटों का आंकड़ा जुटा था।
वहीं, एनडीए गठबंधन 151 सीटों पर सिमट गया था, जिसमें भाजपा ने 67 और समता पार्टी ने 34 सीटें जीती थीं। उस चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। तत्कालीन राज्यपाल ने नीतीश कुमार को सरकार बनाने का न्योता दिया था, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण उन्हें मात्र 7 दिनों के भीतर इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से राबड़ी देवी तीसरी बार मुख्यमंत्री बनी थीं।


