Narayanpur Bhojpur: बिहार के भोजपुर जिले में एक दादी द्वारा अपने ही नवजात पोते को बेचे जाने और अपनी बहू को घर में कैद कर रखने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
- हाइलाइट: Narayanpur Bhojpur
- गड़हनी थाना क्षेत्र के अगिआंव पीएचसी की गत सात दिसंबर की घटना
- बेटे-बहू के प्रेम विवाह से नाराज दादी ने दोनों को अलग करने के लिए अपने पोते को बेच डाला
- बहू के प्रसव के तुरंत बाद दादी ने रोहतास के एक डाक्टर को बेचा था पोता
- 16 दिसंबर को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने चारों को किया गिरफ्तार
- गिरफ्तार आरोपितों में डाक्टर की सहयोगी के साथ मध्यस्थता करने वाली महिला भी शामिल
- बच्चे की दादी के पास से पोते की बिक्री के 49 हजार रुपए बरामद
- नवजात बच्चे और डाक्टर की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस कर रही छापेमारी
आरा, बिहार। मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना भोजपुर जिले में सामने आई है, जहाँ एक महिला ने अपने बेटे के प्रेम विवाह से नाराज़ होकर अपने नवजात पोते को ही बेच दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस जघन्य अपराध में शामिल चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि नवजात की बरामदगी और खरीदने वाले चिकित्सक की तलाश जारी है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना गड़हनी थाना क्षेत्र के अगिआंव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर 7 दिसंबर को घटित हुई। नारायणपुर थाना (Narayanpur Bhojpur) क्षेत्र के स्थानीय नारायणपुर गांव निवासी चितरंजन कुमार की पत्नी खुशबू कुमारी ने प्रसव के तुरंत बाद अपने नवजात शिशु को खो दिया। उसकी सास, क्रिंता देवी पर आरोप है कि उसने बहू के प्रसव के तत्काल बाद गांव की एक महिला की नजदीकी के जरिए रोहतास जिले के एक ग्रामीण चिकित्सक को मात्र 50 हजार रुपए में बच्चे का सौदा कर दिया था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब चितरंजन कुमार की पत्नी खुशबू कुमारी ने 16 दिसंबर को गड़हनी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर नारायणपुर और गड़हनी थाने की पुलिस ने संयुक्त रूप से त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने गहन अनुसंधान के दौरान खुशबू कुमारी की सास क्रिंता देवी, जो नारायणपुर गांव निवासी पंकज रवानी की पत्नी हैं, और उसकी तीन सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया। क्रिंता देवी के पास से नवजात की बिक्री से प्राप्त लगभग 49 हजार रुपए भी बरामद किए गए। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में नारायणपुर गांव निवासी महेंद्र शर्मा की पत्नी कविता शर्मा, इनकी रिश्तेदार आरा की रहने वाली चांदनी शर्मा और रोहतास जिले की प्रीति कुमारी शामिल हैं।
पुलिस पूछताछ के दौरान सभी गिरफ्तार आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। चांदनी शर्मा ने पूछताछ में बताया कि कविता देवी उनकी रिश्तेदार हैं और उन्हीं के कहने पर उसने रोहतास के दिनारा में क्लीनिक चलाने वाले सूर्यपुरा थाना क्षेत्र के हुंकाडीह गांव निवासी डॉ. दिलीप उर्फ हरिशंकर पंडित और उनकी सहयोगी प्रीति कुमारी से बच्चे की बिक्री को लेकर बातचीत की थी। इसके बाद, नवजात को डॉक्टर दिलीप को 50 हजार रुपए में बेच दिया गया। नवजात को खरीदने वाला डॉक्टर अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस डॉक्टर के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
गड़हनी थाना प्रभारी कमलजीत ने बताया कि केस के अनुसंधान और आरोपियों से पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ है कि चितरंजन कुमार और खुशबू कुमारी रिश्ते में चचेरे भाई-बहन थे और उन्होंने प्रेम विवाह किया था। चितरंजन कुमार की मां क्रिंता देवी इस विवाह से बेहद नाराज़ थीं और उन्होंने बेटे-बहू को अलग कराने की नीयत से खुशबू के नवजात बेटे को बेचने की साजिश रची थी। इस घृणित कार्य को अंजाम देने के लिए क्रिंता देवी ने गांव की ही कविता देवी की मदद ली, और कविता शर्मा की पहल पर आरा की चांदनी शर्मा ने नवजात को बेचने में मध्यस्थता की। पुलिस अब नवजात की बरामदगी और उसे खरीदने वाले डॉक्टर दिलीप की गिरफ्तारी के लिए सघन छापेमारी कर रही है।
Narayanpur Bhojpur – मानवीय रिश्तों का पतन: पोते की बिक्री और बहू का उत्पीड़न, पुलिस जांच जारी
खुशबू ने अपने पति चितरंजन कुमार के साथ प्रेम विवाह किया था, जिससे उसकी सास क्रिंता देवी कथित तौर पर नाराज थीं। इसी नाराजगी के परिणाम स्वरूप, जब खुशबू को बच्चा होने वाला था, तब उसकी सास क्रिंता देवी उसे प्रसव के लिए 6 दिसंबर को अगिआंव पीएचसी ले गईं। अगले दिन, 7 दिसंबर की सुबह खुशबू ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद, खुशबू अपनी सास के साथ घर लौट आईं। घर पहुँचते ही, एक चौंकाने वाली घटना हुई। कविता देवी नामक एक महिला, एक पुरुष और दो अन्य महिलाओं के साथ नवजात बच्चे को लेकर चली गई।
जब खुशबू ने अपनी सास से अपने नवजात बेटे के बारे में पूछा, तो उसे यह कहकर टाल दिया गया कि बच्चे को कविता शर्मा की रिश्तेदार चांदनी शर्मा को दे दिया गया है। इस अमानवीय कृत्य के बाद, खुशबू की सास ने उसे घर से बाहर निकलने पर भी पाबंदी लगा दी, प्रभावी रूप से उसे अपने ही घर में कैद कर दिया। करीब पाँच दिनों तक कैद में रहने के बाद, 13 दिसंबर को खुशबू कुमारी किसी तरह घर से भाग निकलने में सफल रही। वह सीधे आरा में अपने एक रिश्तेदार संजू देवी के घर पहुँची। संजू देवी की मदद से वह कचहरी में कार्यरत पूनम देवी से मिलीं और फिर अंततः पुलिस अधीक्षक (एसपी) तक अपनी शिकायत लेकर पहुँच सकीं।
पुलिस अधीक्षक ने इस गंभीर मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। एसपी की पहल पर खुशबू कुमारी को नारायणपुर थाने (Narayanpur Bhojpur) भेजा गया, जहाँ उसकी प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने तुरंत खुशबू कुमारी की सास क्रिंता देवी और कविता शर्मा को पूछताछ के लिए बुलाया। पूछताछ के दौरान, नवजात शिशु को बेचे जाने की बात सामने आई, जिसने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया। इसके बाद, गड़हनी थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खुशबू कुमारी की सास क्रिंता देवी, उसकी सहयोगी कविता शर्मा और आरा निवासी चांदनी शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार चांदनी शर्मा की निशानदेही पर पुलिस ने नवजात की बरामदगी के लिए रोहतास जिले के दिनारा स्थित डॉ. दिलीप की क्लिनिक में छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान, डॉक्टर की सहयोगी प्रीति कुमारी को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन नवजात शिशु और स्वयं डॉक्टर दिलीप मौके पर नहीं मिले। पुलिस अभी भी नवजात बच्चे की तलाश में है और डॉक्टर को भी गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।
प्रेम विवाह के बाद लौटे थे घर .. ज्ञातव्य हो कि खुशबू कुमारी और चितरंजन कुमार के प्रेम प्रसंग की कहानी इस पूरे मामले से जुड़ी हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों के परिवार पहले पंजाब में रहते थे, जहाँ वे एक-दूसरे के करीब आए। करीब तीन महीने तक चले प्रेम प्रसंग के बाद, उन्होंने इसी साल जनवरी में विवाह कर लिया। शादी के बाद वे हाजीपुर आ गए और किराये के मकान में रहने लगे थे। छठ पर्व के अवसर पर ही वे अपने पैतृक गांव आए थे।

