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शास्त्रीय संगीत और पुष्पों की वर्षा के बीच आरा में संपन्न हुआ ‘रंगभरी महोत्सव’

Rangbhari Festival Ara: आरा में श्रेया पांडेय और अजीत पांडेय ने उपशास्त्रीय होली “होरी खेलन आये नटवर नंद किशोर” के माध्यम से ब्रज की होली का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया।

  • हाइलाइट: Rangbhari Festival Ara
  • विदुषी बिमला देवी ने अपनी मधुर आवाज में रँग-रँगीली सिया भई रघुवर भये गुलाल….
  • नन्ही नृत्यांगना शिवाक्षी ने “रंग डालूँगी नंद के लालन”
  • आरोही ने “मोरा कोरी चुनर रंग डारी हाय” गीत से समां बांधा

आरा के महाजन टोली स्थित आनंद कंद कौशल चंद ठाकुर जी के ऐतिहासिक प्रांगण में शास्त्रीय संगीत की लहरों और पुष्पों की सुगंध के बीच ‘रंगभरी महोत्सव’ का आयोजन किया गया। शिवादी क्लासिक सेंटर ऑफ आर्ट एंड म्युजिक द्वारा आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को भक्ति और कला के एक अनूठे संगम से रूबरू कराया। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन वरिष्ठ तबला वादक राणा प्रताप सिंहा एवं प्रख्यात रंगकर्मी कृष्णा यादव ‘कृष्णनेंदु’ ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस गरिमामयी अवसर पर कथक गुरु बक्शी विकास ने भारतीय संस्कृति में रंगों की महत्ता और परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ठाकुरबाड़ी प्रांगण की यह होली मात्र शोर-शराबे का आयोजन नहीं, बल्कि रागरंग, ठुमरी और बनारसी दादरा के माध्यम से भगवान कृष्ण की अटखेलियों और राधा के उमंग को जीवंत करने का एक पवित्र माध्यम है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में विदुषी बिमला देवी ने अपनी मधुर आवाज में “रँग-रँगीली सिया भई रघुवर भये गुलाल” की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। नन्ही नृत्यांगना शिवाक्षी ने “रंग डालूँगी नंद के लालन” गीत पर अपने मनोहारी भाव अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं, श्रेया पांडेय और अजीत पांडेय ने उपशास्त्रीय होली “होरी खेलन आये नटवर नंद किशोर” के माध्यम से ब्रज की होली का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में विविधता लाते हुए दिल्ली पब्लिक स्कूल की संगीत शिक्षिका आरोही ने “मोरा कोरी चुनर रंग डारी हाय” गीत से समां बांधा। सागर चांदनी और माही ने अलग-अलग पारंपरिक होली गीतों के माध्यम से दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में महेश यादव ने होली की विशेष बंदिशों से अपनी कलात्मकता का परिचय दिया, जबकि कथक नृत्यांगना हर्षिता विक्रम ने पारंपरिक कथक के बोल-टुकड़ों और पदचाप से सबको अपनी कला के रंग में रंग दिया।

महोत्सव का मुख्य आकर्षण ब्रज की गोपियों के रूप में प्रस्तुत कलाकारों का समूह रहा। स्नेहा पांडेय, राका, निशा, कामिनी, अनुरागिनी और दीपतारा ने अबीर, गुलाल, केसर और चंदन के साथ ठाकुर जी के चरणों में पुष्प वर्षा की। इस अलौकिक दृश्य ने पूरे प्रांगण को वृंदावन की होली के उल्लास में सराबोर कर दिया, जिसमें उपस्थित अतिथि और कला प्रेमी आनंद की सरिता में गोते लगाते रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन गुरु बक्शी विकास द्वारा किया गया, जबकि समापन पर नृत्यांगना आदित्या ने सभी कलाकारों, अतिथियों और दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।
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