US and Israeli attacks on Iran: ईरान पर अमेरिका और इस्राईल के हमलों के सात दिनों के भीषण संघर्ष के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इस युद्ध का अंतिम परिणाम क्या होगा। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सैन्य रणनीतियों के बीच यह संघर्ष हर गुजरते घंटे के साथ और अधिक जटिल होता जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयानों ने वैश्विक स्तर पर खलबली मचा दी है। एक ओर जहाँ ट्रम्प ने ईरान (Iran) को स्पष्ट रूप से आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी है, वहीं उनके विरोधाभासी बयानों से यह संकेत भी मिल रहे हैं कि स्वयं अमेरिकी प्रशासन इस युद्ध के दीर्घकालिक अंजाम को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
वही ट्रम्प के कड़े रुख के जवाब में ईरान (Iran) ने भी अपने तेवर ढीले नहीं किए हैं। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि वर्तमान संघर्ष तो केवल एक शुरुआत है, जिसका अर्थ है कि आने वाले दिनों में जवाबी कार्रवाइयां और अधिक तीव्र हो सकती हैं।
खाड़ी के देशों के लिए यह समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, इन देशों की मिसाइल इंटरसेप्ट करने की क्षमता धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ती जा रही है, जिससे सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दूसरी ओर, अमेरिका इस युद्ध को अब एक लंबे संघर्ष के रूप में देख रहा है और सितंबर तक की सैन्य तैयारियों की खबरें सामने आ रही हैं। इस पूरे समीकरण में रूस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि ईरान को रूस का रणनीतिक सहयोग मिलने की पुख्ता खबरें सामने आ रही हैं।
ईरान की जवाबी सैन्य कार्रवाई ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञ अब यह सवाल उठा रहे हैं कि ईरान कब तक केवल मिसाइलों के दम पर इस युद्ध को जारी रख पाएगा। क्या आधुनिक अमेरिकी और इस्राईली लड़ाकू विमानों और शक्तिशाली युद्धपोतों के सामने ईरान की मिसाइल तकनीक लंबे समय तक टिक सकेगी? यह एक ऐसा प्रश्न है जो आने वाले दिनों में युद्ध की दिशा निर्धारित करेगा।
इस युद्ध में एक सप्ताह के भीतर ईरान में 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि पश्चिमी एशिया में तीन लाख से अधिक लोग अपना घर छोड़कर विस्थापित होने को मजबूर हुए हैं। युद्ध के केवल सातवें दिन ही तबाही का यह मंजर पूरे विश्व की स्थिरता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं तलाशे गए, तो यह संघर्ष एक ऐसी तबाही का रूप ले सकता है जिसकी भरपाई दशकों तक संभव नहीं होगी।


