US attack on Iranian warship: हिंद महासागर: भारतीय युद्धाभ्यास से लौट रहे ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमला और उठते गंभीर सवाल
- हाइलाइट: US attack on Iranian warship
- द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के इतिहास में किसी युद्धपोत को डुबोए जाने की यह चौथी बड़ी घटना
US attack on Iranian warship: विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक युद्धाभ्यास ‘मिलन’ के सफल समापन के बाद हिंद महासागर क्षेत्र से एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना सामने आई है। भारत के विशेष निमंत्रण पर इस युद्धाभ्यास में सम्मिलित होने आए ईरानी नौसेना के युद्धपोत ‘IRIS DENA’ पर श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र के निकट एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा हमला किया गया। इस भीषण हमले में युद्धपोत दो खंडों में टूटकर समुद्र में समा गया। प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, इस घटना में ईरानी नौसेना के कई अधिकारियों और नाविकों की मृत्यु हो गई है, जबकि कुछ अन्य लापता बताए जा रहे हैं। डूबने से पूर्व ईरानी जहाज द्वारा भेजे गए संकट संदेश (डिस्ट्रेस कॉल) के आधार पर श्रीलंकाई नौसेना ने तत्काल बचाव अभियान चलाकर लगभग 30 से 32 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी अधिक संवेदनशील है क्योंकि यह युद्धपोत भारत के एक महत्वपूर्ण राजनयिक और सैन्य आयोजन का हिस्सा था। 18 फरवरी को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विशाखापत्तनम में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का निरीक्षण किया था, जिसमें IRIS DENA ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इस आयोजन के दौरान ईरानी नौसेना के प्रमुख शाहरम ने भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल डी.के. त्रिपाठी से मुलाकात कर द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की थी। 25 फरवरी को युद्धाभ्यास की औपचारिक समाप्ति के बाद, जब यह जहाज अपनी स्वदेश वापसी की यात्रा पर था, तब अमेरिकी नौसेना द्वारा इसे निशाना बनाया गया।
US attack on Iranian warship: पेंटागन द्वारा सैन्य कार्रवाई की पुष्टि
इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि स्वयं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेजसेथ ने पेंटागन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। उनके साथ अमेरिकी आर्मी स्टाफ के जॉइंट चीफ डैन केन भी उपस्थित थे। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि उस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए यह कार्रवाई की।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के इतिहास में किसी युद्धपोत को डुबोए जाने की यह चौथी बड़ी घटना है। विशेष रूप से ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि हमले के समय ईरानी युद्धपोत किसी भी प्रकार की युद्धक कार्रवाई में शामिल नहीं था, बल्कि वह एक मित्र राष्ट्र के निमंत्रण पर आयोजित अभ्यास से वापस लौट रहा था। इस घटना ने हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों पर चार बड़े प्रश्न खड़े कर दिए हैं:
प्रथम, हिंद महासागर के इस संवेदनशील क्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी की उपस्थिति और उसकी सक्रियता का वास्तविक औचित्य क्या था?
द्वितीय, क्या घातक हथियारों से लैस अमेरिकी पनडुब्बी समुद्र की गहराइयों में छिपकर उस ईरानी युद्धपोत की वापसी का इंतजार कर रही थी जो एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक युद्धाभ्यास का हिस्सा बनकर लौट रहा था?
तृतीय, एक गैर-युद्धक स्थिति में लौट रहे जहाज से आखिर किस देश या इलाके को ऐसा तात्कालिक खतरा उत्पन्न हो गया था कि अमेरिकी नौसेना को उस पर इस प्रकार हमला करना पड़ा?
चतुर्थ, इस संपूर्ण प्रकरण में सबसे आश्चर्यजनक पहलू मेजबान देश की प्रतिक्रिया का है। हिंद महासागर में हुई इस बड़ी सैन्य कार्रवाई पर, जो भारत के निमंत्रण पर आए एक अतिथि देश के जहाज के साथ हुई है, अब तक मेजबान देश की ओर से कोई उल्लेखनीय आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने क्यों नहीं आई है?


