Two AK-47 – Bhojpur: अप्रैल 2025 में बिहार एसटीएफ ने भोजपुर के आरा में कुख्यात बुटन चौधरी के घर पर छापा मारा, जहां से एक AK-47 के साथ हैंड ग्रेनेड बरामद हुए थे। इसी साल सितंबर में शाहपुर नगर के पंकज राय उर्फ सत्यजीत राय और अंकित कुमार को पकड़ा गया। उनके घरों से एक लोडेड AK-47, देसी बंदूकें, पिस्टल, रिवॉल्वर, थरनेट, 76 कारतूस, पांच मैगजीन और तीन फोन जब्त किया गया है।
- हाइलाइट: Two AK-47 – Bhojpur
- समाज में आतंक और भय का माहौल भी पैदा करना चाहते हैं अपराधी
Two AK-47 – Bhojpur आरा। अपराध की दुनिया में हथियारों की तस्करी, बिहार में यह एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है, लेकिन अप्रैल 2025 भोजपुर के बेलाउर गांव से और सितंबर 2025 भोजपुर के शाहपुर नगर में AK-47 मिलने के घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज भी यह तस्करी धड़ल्ले से जारी है। बिहार पुलिस और एनआईए की संयुक्त जांच में यह बात सामने आई है कि पूर्वोत्तर राज्यों से AK-47 जैसी घातक हथियारों की तस्करी बिहार में हो रही है, जिसमें नागालैंड सबसे आगे है।
म्यांमार की सीमा से सटे इलाकों के रास्ते ये हथियार सस्ते में खरीदे जाते हैं और जब ये बिहार पहुंचते हैं, तो इनकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है। वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में इनकी खरीद-बिक्री का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जो न केवल स्थानीय अपराध को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बन चुका है। मई 2024 में मुजफ्फरपुर से शुरू हुई जांच ने इस पूरे रैकेट को उजागर कर दिया था और अब चार आरोपियों पर चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
मुजफ्फरपुर में ही इस नेटवर्क को पहला बड़ा झटका लगा था। मई 2024 में स्थानीय पुलिस ने रेलवे स्टेशन से विकास कुमार और सत्यम कुमार को गिरफ्तार किया, जिनके पास AK-47 का बट और स्कोप बरामद हुआ। जब पुलिस ने इनकी जांच की, तो पता चला कि विकास ने गोपालगंज के अहमद अंसारी से यह हथियार खरीदा था, जो नागालैंड के दीमापुर से सप्लाई होता था।
तीन दिन बाद अंसारी को दीमापुर से पकड़ा गया, उसके पास मोबाइल और वॉकी-टॉकी भी मिले। एनआईए ने अगस्त 2024 में इस केस को अपने हाथ में लिया और हाल ही में 29 अगस्त को मंजूर खान उर्फ बाबू भाई को गिरफ्तार किया। मंजूर विकास का करीबी था और वह नागालैंड से AK-47 और गोलियों की तस्करी में मुख्य सूत्रधार था। एनआईए के अनुसार, ये हथियार म्यांमार के रास्ते आते हैं, जहां एक AK-47 महज 17 हजार रुपये में मिल जाती है, लेकिन बिहार पहुंचने पर इसकी कीमत 7 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।
वहीं, अप्रैल में बिहार एसटीएफ ने भोजपुर के आरा में कुख्यात बुटन चौधरी के घर पर छापा मारा, जहां से एक AK-47 के साथ हैंड ग्रेनेड बरामद हुए थे। इसी जिले के शाहपुर नगर में हाल ही में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो अपराधियों पंकज राय उर्फ सत्यजीत राय और अंकित कुमार को पकड़ा गया। उनके घरों से एक लोडेड AK-47, देसी बंदूकें, पिस्टल, रिवॉल्वर, थरनेट, 76 कारतूस, पांच मैगजीन और तीन फोन जब्त किए गए है।
पंकज राय हत्या के मामले में जेल भी जा चुका है। दोनों का अंतरराज्यीय गिरोह से कनेक्शन की जांच की जा रही है। पुलिस को शक है कि ये हथियार भी नागालैंड के ही रूट से आए थे। पूर्वी चंपारण और वैशाली में भी ऐसी खरीद-फरोख्त की खबरें मिल रही हैं, जो बिहार की कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। एनआईए की जांच जारी है, जिसमें चीन और म्यांमार के रूट की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
हथियार तस्करों का मकसद केवल सार्वजनिक शांति भंग करना और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालना नहीं है, बल्कि वे समाज में आतंक और भय का माहौल भी पैदा करना चाहते हैं। बिहार पुलिस ने अब सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वोत्तर से आने वाले रूट को पूरी तरह सील करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। यदि यह नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया, तभी अपराध दर में कमी आ सकती है। फिलहाल, जांच एजेंसियां अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी हैं, ताकि इस रैकेट को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

