Jalebis : राजद के युवा नेता दीपू राणावत यादव ने अपने हाथों से गर्म कड़ाही में जलेबियां बनाईं और फिर उन्हें पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच वितरित किया।
- हाइलाइट: Jalebis
- दीपू राणावत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल
- जलेबी बेचा करते थे सेठ जी, सुर्खियों में था बिजेंद्र यादव का यह ब्यान
आरा। दीन-दुनिया की राजनीति में अक्सर शब्दों के तीर चलाए जाते हैं, लेकिन भोजपुर-बक्सर के MLC चुनाव ने दिखा दिया है कि जनता का फैसला सबसे ऊपर है। भोजपुर जिला के अगिआंव से रविवार को जश्न की जो तस्वीरें सामने आई है न केवल राजनीतिक विजय को दर्शाती हैं, बल्कि जलेबी की यह मिठास आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत भी है।
भोजपुर-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव में महागठबंधन के प्रत्याशी सोनू कुमार राय की जीत ने राजद खेमे में उत्साह का संचार किया है। इस जीत का आज मुख्य केंद्र पूर्व विधायक अरुण यादव और उनकी पत्नी विधायक किरण देवी का अगिआंव स्थित आवास बना, जहां कार्यकर्ताओं की भीड़ और जीत का उल्लास देखते ही बन रहा था।
Jalebis : दीपू राणावत का अनूठा अंदाज , जलेबियां बनाईं
इस ऐतिहासिक जीत के दौरान जो दृश्य सबसे अधिक चर्चा का विषय बना, वह राजद के युवा नेता दीपू राणावत यादव का वह अंदाज था, जिसने राजनीतिक गंभीरता के बीच एक अनूठी मिठास घोल दी। दीपू राणावत ने अपने हाथों से गर्म कड़ाही में जलेबियां बनाईं और फिर उन्हें पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच वितरित किया। यह महज एक सामान्य जश्न नहीं था, बल्कि यह दीपू राणावत का वह संकल्प था जिसे उन्होंने चुनाव के दौरान ही सार्वजनिक किया था।
उन्होंने वादा किया था कि जीत के बाद वे अपने हाथों से जलेबियां बनाकर खुशी साझा करेंगे, और परिणाम आने के साथ ही उन्होंने अपने शब्दों पर अडिग रहकर अपना वादा पूरा किया। वर्तमान में उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जीत के जश्न में ‘जलेबी’ ही क्यों?
हालांकि, इस जीत के जश्न में ‘जलेबी’ ही क्यों? यह कोई संयोग नहीं है। इसके पीछे विवादों की पृष्ठभूमि रही है। एमएलसी चुनाव की प्रक्रिया के दौरान, पूर्व विधायक बिजेंद्र यादव द्वारा दिया गया एक बयान काफी विवादों में रहा था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि जब वे इंटरमीडिएट में पढ़ते थे, तब विधायक राधाचरण साह जलेबी बेचा करते थे। संदेश के विधायक राधाचरण सेठ ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया था और इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।
चुनावी शोर-शराबे के बीच जलेबी पर हुई यह बयानबाजी एक बड़े विवाद का कारण बनी थी। लेकिन, 14 मई को जब उपचुनाव के परिणाम सामने आए और जीत महागठबंधन की झोली में गई, तो राजद कार्यकर्ताओं ने इसी जलेबी को जीत की मिठास में बदलकर एक प्रतीकात्मक संदेश दिया है। यह जीत केवल सीट की नहीं, बल्कि उन बयानों पर जनता द्वारा लगाई गई मुहर भी मानी जा रही है।

