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पूर्व मंत्री ददन पहलवान ने अपने समय के दो जयचंदों पर साधा निशाना

कहा: राजद में शाहाबाद के दो जयचंदों ने मेरी राजनीति को समाप्त करना चाहा

RJD Jaichands: ददन पहलवान ने कहा की आज स्थिति ऐसी है कि एक जयचंद को लालू जी “धृतराष्ट्र” के रूप में दिखाई देने लगे हैं।

  • हाइलाइट:
    • कहा: 2004 और 2009 में स्वयं लालू जी ने मुझे लोकसभा टिकट के लिए बुलाया, लेकिन जयचंदों की हठधर्मी सोच ने रास्ता रोक दिया।

RJD Jaichands: पूर्व मंत्री ददन यादव (पहलवान) ने राजद के जयचंदों का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा कि साल 2000 मेरे राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। निर्दलीय चुनाव जीतकर जब मैंने राबड़ी देवी जी को समर्थन देकर सरकार बनाई, तब मुझे मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली। तभी से शाहाबाद के दो जयचंदों ने मेरी राजनीति को समाप्त करने की ठान ली और वर्षों से यही साजिश रचते आए हैं। कुछ हद तक वे इसमें सफल भी हुए हैं।

इन दोनों व्यक्तियों ने न केवल मुझे लालू परिवार से दूर रखा, बल्कि हर बार मेरी राजनीतिक राह रोकने का प्रयास किया। आज स्थिति ऐसी है कि एक जयचंद को लालू जी “धृतराष्ट्र” के रूप में दिखाई देने लगे हैं। मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान, सुर्खियों की चाहत में टाटा गाड़ी का मुद्दा जानबूझकर उठाया गया, ताकि परिवार को बदनाम किया जा सके और यही खबर अखबारों में छा गई।

मैंने तब भी लालू जी से कहा था कि यह व्यक्ति न मेरे लिए उचित है, न आपके लिए। परंतु, राजनीति में सच्चाई अक्सर शक्तिशाली की जिद के आगे दब जाती है। 2004 और 2009 में स्वयं लालू जी ने मुझे लोकसभा टिकट के लिए बुलाया, लेकिन जयचंदों की हठधर्मी सोच ने रास्ता रोक दिया। और वे स्वयं चुनाव लड़े, उन्हीं के साथ मैं भी निर्दलीय मैदान में उतरा। जनता के अपार स्नेह और विश्वास का परिणाम यह रहा कि मैं रनर-अप रहा, जबकि वे तीसरे स्थान पर रहे।

पार्टी का इतिहास उठाकर देखिए, पिछले 15 वर्षों में ऐसे ‘जयचंदों’ ने केवल अपने परिवार की राजनीति को ही आगे बढ़ाया है। जब भी अवसर मिला, पार्टी को दरकिनार कर स्वयं का या अपने परिवार का हित साधा। पार्टी का असली योगदान तो वे सच्चे कार्यकर्ता देते हैं, जो बिना किसी लालच के पार्टी के लिए झंडा उठाते हैं, न कि ये जयचंद, जो केवल अपनी सुविधा देखते हैं।

इन सभी साजिशों के बावजूद, मैं न झुका हूँ, न टूटा हूँ। मैं सरकारी शिक्षक की नौकरी छोड़कर जनता की सेवा करने आया हूँ। मैं शिक्षक हूँ, पहलवान हूँ, योद्धा हूँ – जनता का सिपाही हूँ। हार और थकान मेरे शब्दकोश में नहीं हैं। मैं अपनी अंतिम सांस तक सामंतवादी सोच और राजनीति के दुराचार से लड़ता रहूंगा।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।
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