Bihiya Khadra Mor: जगदीशपुर के पूर्व विधायक भाई दिनेश ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
- हाईलाइट: Bihiya Khadra Mor
- पूर्व विधायक भाई दिनेश ने दी आंदोलन की चेतावनी
आरा। भोजपुर जिले के बिहिया-जगदीशपुर स्टेट हाईवे पर खदरा मोड़ (बिहिया) के समीप व्याप्त जलजमाव की विकराल समस्या ने स्थानीय निवासियों और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है। इस गंभीर समस्या को लेकर जगदीशपुर के पूर्व विधायक भाई दिनेश ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पूर्व विधायक ने स्थिति की भयावहता का उल्लेख करते हुए कहा कि खदरा मोड़ का यह मार्ग अब सड़क न रहकर एक तालाब में तब्दील हो चुका है। रोजाना हजारों की संख्या में गुजरने वाले स्कूली छात्र, किसान, मरीज और वाहन चालक जान जोखिम में डालकर यहां से निकलने को विवश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की चुप्पी और उदासीनता के कारण स्थिति बदतर होती जा रही है।
Bihiya Khadra Mor : पिछले वर्ष भी मछली पकड़कर किया था प्रदर्शन
भाई दिनेश ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए याद दिलाया कि पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर भीषण जलजमाव के विरोध में स्थानीय जनता के साथ मिलकर उन्होंने सड़क जाम और विरोध स्वरूप मछली पकड़कर प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा कि उस समय लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च कर सड़क का निर्माण तो कराया गया, परंतु जल निकासी के लिए उचित ड्रेनेज सिस्टम या नाले का निर्माण नहीं किया गया। यह सरकारी धन का सीधा दुरुपयोग और संबंधित अभियंताओं की घोर लापरवाही को दर्शाता है।
इस मार्ग से जिले के जिलाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और जन-प्रतिनिधि निरंतर गुजरते हैं। बावजूद इसके, इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस पहल न होना प्रशासन की संवेदनहीनता का प्रमाण है।
पूर्व विधायक ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित की जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व अभियंताओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने जोर दिया कि जल्द से जल्द स्थायी नाले का निर्माण कर इस मार्ग को आवागमन के योग्य बनाया जाए।
प्रशासन को सख्त अल्टीमेटम देते हुए भाई दिनेश ने स्पष्ट किया कि यदि एक सप्ताह के भीतर इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे स्थानीय जनता के साथ खदरा मोड़ पर बीच सड़क पर उतरकर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या जन-असुविधा के लिए पूर्णतः जिला प्रशासन और संबंधित विभाग जिम्मेदार होंगे।

